Poem - Yun Milo Tum Mujhe Kahin
- Manish K Pandey

- Oct 9, 2025
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यूँ मिलों तुम मुझे कहीं एक सोमवार सी
मैं कंधों पर तुम्हारी सारा भार छोड़ आऊँ
तुम टकरा गए जो मुझसे मंगलवार को
मैं कुछ मुश्किलें कुछ सहूलियतें कुछ करार छोड़ आऊँ
जो नजरे फिर आ मिली हमारी बुधवार को
बेचैनी ना झलक जाये इस बार तो
शायद मुझसे ना मिले जो तुम्हारा गुरुवार हो
पूरा दिन गुजर जाए और ना दीदार हो
शुक्रवार मुझको खोजते तुम खुद आओगे
मुझे अपने पास बैठा देख तुम शुक्र मनाओगे
शनिवार शाम सी दीवानी मोहब्बत का फिर इंतजार होगा
कुछ वादे.. कुछ कसमें.. कुछ इकरार.. नजाने क्या क्या इजहार होगा
फिर उन्हीं खूबसूरत बाँहों के साये मै नजाने कब इतवार आ जाएगी
चाहत के फर्श पर बीच में शिकायतों की एक दीवार आ जाएगी
फिर नयी सुबह होगी.. नया दिन.. नया हफ्ता होगा
कहीं दर्द होगा.. कहीं आसुओं के छीटें होंगे ...तो कहीं किसी को फिर से प्यार हो जाएगा
कोई तरसता रह जाएगा ... फिर से उस हफ्ते को जीने की खातिर
तो कोई कहीं किसी ओर का सोमवार हो जाएगा ||
Poem by Manish




😂 amazing & hilarious at times.
Very beautiful