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#54 समय तो है एक बहती धारा

  • Writer: Vaishali Chaudhary
    Vaishali Chaudhary
  • Feb 25, 2025
  • 1 min read

समय तो है एक बहती धारा , 

उसको थाम नहीं सकते तुम; 

काल तो है एक ऐसी माया, 

जिसको जान नहीं सकते तुम। 

जिस पल को आकर जाना था, 

वो पल आकर के गुजर गया; 

बीता हर एक पल भूतकाल की, 

गलियों से होकर निकल गया। 

छोड़ो चिंता बीते कल की, 

क्या उसको कभी बदल सकते हो? 

जीना है तो बस आज को जीओ, 

क्यों व्यर्थ इसे तुम करते हो? 

छोड़ सभी बीती बातों को, 

सुखमय कर लो वर्तमान को; 

भूतकाल की डगर छोड़ कर 

करो सुनहरा भविष्य काल को।



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