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#43 फ़लसफा-ऐ-ज़िंदगी

  • Writer: Luvv A Sanwal
    Luvv A Sanwal
  • Feb 11, 2025
  • 1 min read

जाने क्या-क्या मांग लिया, जाने क्या ये सिलसिला है 

हसरतों की किस्मत में अधूरापन ही लिखा है 


चाहने भर से उतर नहीं आते सितारे झोली में 

फिर क्यों-कर, और किस से, ये शिकवा गिला है


कि हर उम्र में बदलती रहती हैं ख्वाहिशें 

जिंदगी का नाम ही अरमानों का काफ़िला है


देख ज़रा उस बगीचे की फितरत को ऐ दोस्त तू

पतझड़ को झेल कर भी, वो कैसे खिला-खिला है 


जो नहीं हुआ हासिल, उसका क्यों मलाल है 

कहां संभाल पाए वो ही, जो किस्मत से मिला है 


जो मिल जाए, शुक्र कर, और प्रयास करता जा

कि मिलना-बिछड़ना, ये सब कर्मों का सिला है 


  • Reema Arora

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Piyush Hirpara
Piyush Hirpara
Feb 13, 2025
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Kya baat hai

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