Hindi Poem - Agar Main
- Dr. Jhumpa Sarkar Mandal

- Feb 27
- 2 min read

Poem - ।।अगर मैं रश्मि बन जाऊं।।
मेरे मन में ख्याल ये आए
काश ऐसा करिश्मा हो जाए
अपने मन की स्पीड पकड़कर
कभी कहीं भी घूमने जाए।
जब रश्मि का शरीर हो मेरा
क्यों ना हर युग में लहराऊं
कभी कृष्ण के साथ में खेलूं
कभी साथ में गइया चराऊं।
और कभी मैं खग बन जाऊं
उड़कर राम लला तक जाऊं
उनकी मीठी वानी सुन लूं
अपने जीवन को धन्य बनाऊं।
दूजे पल मैं चीन पहुंच कर
ग्रेट वॉल के ऊपर चढ़ जाऊं
मैं भी तो जानूं उसका गौरव
इतिहास में उसकी भागी बन जाऊं।
क्यों ना मैं इजिप्ट पहुंच कर
पिरामिडों को बनते देखूं
उनके सारे राज समझ लूं
सारी पहेलियों को सुलझाऊं।
पल में पहुंचुं ईस्टर आईलैंड
शिला दैत्य से नज़रे मिलाऊं
सारे उनके भेद जान लूं
माया सभ्यता से मिल आऊं।
मरियाना ट्रेंच या नाज़्का लाइंस
सबके रहस्य मैं ही सुलझाऊं
जल परियों के साथ तैरकर
बरमूडा ट्रायंगल के भीतर हो आऊं।
गहरे समुद्र की दुनिया देखूं
नई प्रजातियों से मिल आऊं
जहां सूर्य भी ना हो पहुंचता
उस कोर तक मैं पहुंच जाऊं।
धरती का मैं आकर्षण छोडूं
अंतरिक्ष की सैर कर आऊं
एंड्रोमेडा के पार निकल लूं
ब्लैक होल से पार हो जाऊं।
क्वांटम फिजिक्स की राह मोड़ दूं
फोर्थ डाइमेंशन पर ऐसे मंडराऊं
गॉड पार्टिकल के भीतर घुस कर
सबसे छोटा पार्टिकल बन जाऊं।
लेकिन शायद फिर एक दिन
जीवन बड़ा निरस हो जाए
सारी राज की बातें जानकर
धरती का रोमांच खो आऊं।
तब क्या अपनी धरती पर मैं
पहले जैसा जीवन बिता पाऊं
शायद अपनी बातों के बदौलत
एक ज्ञानी पागल कहलाऊं।
—डॉ. झुम्पा सरकार




Beautiful poem