Hindi Poem - Hunar
- Chhaya Kumari

- 6 hours ago
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हुनर
तुम कहते हो मुझमें कोई हुनर नहीं है।
ठीक कहते हो… शायद।
क्योंकि जो दिखता है,
उसे देख लेना आसान होता है,
और जो महसूस होता है ,
उसे देखने के लिए नज़र नहीं, नज़रिया चाहिए।
पर अगर सच में जानना चाहो, तो एक बात कहूँ ,



