Poem - Wahi aaj tak mere sath hai
- Manish K Pandey

- Sep 29, 2025
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Poem -
एक उम्र गुज़ारी है उसके नाम से...
शामें बीती हैं जाम पे जाम से...
पर कोई शिकवा नहीं... गिला नहीं...
क्या हुआ जो वो मुझको मिला नहीं...
वो ना है पर अब भी उसका एहसास है...
वो जुदा हुआ तो यूं हुआ...
मेरा एक हिस्सा अब भी उसके पास है...
ये ज़िन्दगी है वीरान सी... जो लगती एक चांदनी रात है...
वो जो चला गया मुझे छोड़कर...
वही आज तक मेरे साथ है...
अधूरा रह गया जो ये इश्क़ मेरा
इसमें उसकी कोई जफ़ा नहीं
है दर्द तो कहीं एक गहरा सा...
पर मैं उससे ख़फ़ा नहीं
वो दुश्मन भी है.. वो ही मेरा रक़ीब है..
वो दूर हो के भी लगता है जैसे क़रीब है
वो ख़ुशबू अब भी है मेरे रूबरू...
मेरे हथेलियों पे अब भी जैसे उसका ही हाथ है
वो जो चला गया मुझे छोड़कर
वही आज तक मेरे साथ है
मेरा नाम तक जो ना ले सका
जो मुझे करार ना दे सका
जिसे इख़्तियार तो था मगर...
मुझे अपना प्यार ना दे सका
वो सख़्त दिल इंसान है..
या बेरहम मेरे हालात हैं...
जो ना मिल सका वो बेवफ़ा
ये कहना भी तो अजीब बात है...
वो शख़्स आज भी मेरी तलाश है...
वो दर्द अब भी मेरे हयात है
वो जो चला गया मुझे छोड़ कर...
वही आज तक मेरे साथ है..
Poem by Manish K Pandey




Such a heart touching poem 💝
Beautifully written with the emotions of waiting....
Beautiful, touched heart