Aasman - Poem by Ankush Anand
- Ankush Anand

- Sep 4, 2025
- 1 min read

आसमान
वो भरा है,
घनघोर बादलों से,
फिर भी बरसता नहीं है,
वो रुबरु भी है,
उसकी अपनी ज़मीं से,
लेकिन कुछ कर पाता नहीं है,
विचारों में मग्न,
दूर बैठे निहारता,
ढाल बनकर, सब वो सहकर,
खुद को बस संभालता,
किसे समझ आएगा,
उसका बोझ,
उसकी दुविधा,
उसका डर,
वो चाहता हो बूंदाबादी,
और हो गई बरसात,
वो चाहता हो गर्मजोशी,
मगर हो जाए गर्मी,
वो चाहता हो बस नमी,
और हो जाए बर्बादी,
वो समेट लेता होगा,
सारा का सारा वो भाप,
उसकी इस कोशिश में,
ज़मीं को सहना पड़ता हो ताप,
वो करे तो क्या करे,
एक ओर सैलाब है,
दुसरी ओर लपटें,
वो बस जूझ रहा है,
तालमेल बिठाने को।
वो मन है, जो आसमान है,
वो प्रेम है, जो बादल है,
वो चित है, जो धूप है,
लपटें हैं उसकी समझ उसके विचार,
और सैलाब सा है उसका प्यार,
रचयिता: अंकुश
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Wah 👏🤌
Apt words🤌❤️
Wah
The way you write Ankush gives me the relief and soulful poem.