Platform Number 7 - Part 1 (Hindi)
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कहते हैं, ज़िंदगी और मौत के बीच बस एक सांस का फासला होता है…
पर अगर किसी की वो आख़िरी सांस किसी और की ज़िंदगी बदल दे तो?
ये कहानी है आदित्य की: एक ऐसे इंसान की, जो अपनी हार मान चुका था,
और पल्लवी की: जो शायद ज़िंदगी से हार चुकी थी,
पर फिर भी किसी और को ज़िंदगी देना चाहती थी।
एक शाम, प्लेटफॉर्म नंबर 7 पर शुरू हुई ये मुलाक़ात,
सिर्फ़ दो लोगों की नहीं थी,
बल्कि दो दुनियाओं की थी:
एक इस पार… और एक उस पार।
कभी-कभी, किसी अजनबी की कही हुई एक बात
ज़िंदगी का मतलब बदल देती है।
पर क्या हो जब वो अजनबी… ज़िंदा ही न हो?

