Poem - मौन
- Dr. Jhumpa Sarkar Mandal

- Sep 26, 2025
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क्या इतना मुश्किल है
किसी के मौन में,
उसकी मजबूरी,
कमजोरी या
स्वीकृति को ढूंढना?
या बहुत आसान है,
सब कुछ अनदेखा कर देना।
क्योंकि,
सब कुछ तुम्हारा है;
यहां तक के मैं भी।
डरती हूं,
नहीं, तुमसे नहीं,
बल्कि खुद से,
कहीं मौन ना टूट जाए
और बह जाए
तुम्हारा सब कुछ।
मेरा क्या?
मेरा तो कुछ था ही नहीं...
© Dr. Jhumpa Sarkar




Very deep and pleasant poem
Butiful poem
Good
Beautiful poem